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क्या आंगनवाड़ी केंद्रों के छोटे बच्चे बड़े बच्चो से ज्यादा खाते हैं?

ये बात सुनने और पढ़ने में अजीब लग सकता है लेकिन icds के ड्राई राशन वितरण के यही नियम है और आंगनवाड़ी केंद्रों के 6 माह से 3 वर्ष तक के बच्चो और 3 वर्ष से 6 वर्ष तक के बच्चो में ड्राई राशन के वितरण की मात्रा जानकर आपको हैरानी हो सकती है

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आंगनवाड़ी केंद्रों पर 2020 से उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा कुपोषित बच्चो को सुपोषित करने के उद्देश्य से सूखा राशन वितरण की योजना लागू की गई जिसमें गेँहू, चावल,तेल,दाल सूखा दूध,घी को मेनू में शामिल करते हुए आंगनवाड़ी केंद्रों पर अलग अलग श्रेणी के अनुसार वितरण के आदेश जारी किए गए लेकिन कुपोषण की स्थिति जस की तस बनी रही जिसके कारण मेनू से सूखा दूध और घी को बन्द कर दिया गया

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वर्तमान में आंगनवाड़ी केंद्रों के 6 माह से 3 वर्ष तक के बच्चो को एक kg गेंहू, एक kg चावल,एक kg दाल और .455 ml सरसो का तेल दिया जा रहा है अब इसकी तुलना 3 वर्ष से 6 वर्ष तक के बच्चो से की जाए तो इसकी मात्रा आधी हो जाती है जैसे गेंहू 500 ग्राम,चावल 500 ग्राम,दाल 500 ग्राम ही रहती है जबकि इन बड़े बच्चो के मेनू से तेल को गायब ही कर दिया गया है इन बड़े बच्चो को तेल नही दिया जाता है जबकि 3 वर्ष से 6 वर्ष तक के बच्चो के शारीरिक विकास के लिए इसकी मात्रा दुगनी होनी चाहिए

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चूंकि 3 वर्ष से 6 वर्ष तक के बच्चो का शिक्षण कार्य शुरू हो जाता है और इसके लिए प्राथमिक विद्यालय में मिड डे मील में गर्म भोजन देने की व्यवस्था की गई है लेकिन ये योजना भी काफी अर्से से बन्द चल रही है प्राथमिक विद्यालय में नामांकन बच्चो को पका हुआ भोजन के लिए उनके राशन के मद में पैसे अभिभावकों के बैंक खातों में हस्तांतरित किये जाते है तो इन 3 वर्ष से 6 वर्ष तक बच्चो के साथ भेदभाव क्यो किया जाता है

क्या इसी राशन से आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चो का कुपोषण दूर होगा


आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चो के लिए पका हुआ गर्म भोजन की व्यवस्था के लिए 2006 में हॉटकुक्ड योजना की शुरुवात की गई थी जिसमे एक सप्ताह का मेनू होता था इस योजना को लागू होने से आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चो की संख्या में काफी तादाद में बढ़ोत्तरी हुई थी लेकिन ये योजना भी कानून के घेरे में रही और सुप्रीमकोर्ट के आदेश का इंतजार करती रही

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