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मानदेय बढ़ोत्तरी और ग्रेच्युटी को लेकर हाईकोर्ट में आंगनवाड़ी वर्करो की याचिका स्वीकार

योगी सरकार से हताश होकर मानदेय बढ़ोत्तरी और ग्रेच्युटी को लेकर आंगनवाड़ी वर्करो ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है यूपी सरकार नए नए प्रलोभन देकर आंगनवाड़ी वर्करो से छल कर रही है यूपी की योगी सरकार 2017 से आंगनवाड़ी वर्करो के मानदेय में बढ़ोत्तरी की बात तो करती है लेकिन कभी लागू नही करती 6 वर्ष से लगातार इन जुमलों से परेशान होकर आखिरकार आंगनवाड़ी वर्करो को अब आंगनवाड़ी वर्करो को कोर्ट से ही न्याय की उम्मीद बची है

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मानदेय बढ़ोत्तरी और ग्रेच्यूटी के सम्बंध में लखनऊ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है यह याचिका दो आंगनवाड़ी वर्करो द्वारा दायर की गई है इस याचिका में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्रालय के सचिव,उत्तरप्रदेश के मुख्य सचिव,बाल विकास सेवा पुष्टाहार निदेशक समेत चार लोगों को प्रतिवादी बनाया गया है आंगनवाड़ी वर्करो की तरफ से इस केस की पैरवी का जिम्मा वकील बृजेश कुमार तिवारी और अभिलाषा पांडेय संभाल रहे है

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आंगनवाड़ी वर्करो द्वारा दायर इस याचिका में कहा गया है कि आंगनवाड़ी वर्कर सरकार द्वारा बाल विकास विभाग में चलाई जा रही हर योजनाओं का निर्वाह करती है इन योजनाओं में 0 से 6 वर्ष तक के बच्चो के टीकाकरण, स्वास्थ्य की देखभाल से लेकर शिक्षित करने तक की जिम्मेदारी संभाल रही है बच्चो के कुपोषण को दूर करना ,समय समय पर टीकाकरण करने से लेकर गर्भवती महिलाओं की देखभाल करना भी आंगनवाड़ी वर्करो की जिम्मेदारी होती है डिलीवरी होने के बाद धात्री महिलाओं का भी ध्यान रखा जाता है साथ ही किशोरी बालिकाओं की जिम्मेदारी भी आंगनवाड़ी वर्करो की ही होती है लेकिन सरकार आंगनवाड़ी वर्करो को बहुत ही कम मानदेय देती है आंगनवाड़ी वर्करो को भी अन्य कर्मियों की तरह समान काम समान मानदेय मिलना चाहिए साथ ही अन्य राज्यो की तरह उत्तरप्रदेश में भी आंगनवाड़ी वर्करो को ग्रेच्युटी का लाभ दिया जाना चाहिए

इस याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायधीश विवेक चौधरी ने याचिकाकर्ता को याचिका में लगाये गए सभी दस्तावेजों की प्रति (ग्रेच्युटी के सम्बंध में सुप्रीमकोर्ट के निर्णय, व अन्य निर्णय) तीन सप्ताह के अंदर मुख्य सचिव को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए है और राज्य सरकार से चार माह के अंदर उपलब्ध कराए गए दस्तावेजोंके आधार पर निर्णय के सम्बंध में जवाब दाखिल करने को कहा गया है अगर सरकार कोई जवाब दाखिल नही करती है तो याचिकाकर्ता पुनः कोर्ट आने के लिए स्वतंत्र है

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