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83 बोरी पंजीरी घर मे रखने वाली गोदाम इंचार्ज को सात साल की सजा

इटावा जनपद मे बाल विकास विभाग से रिटायर स्टोर कीपर ज्योति को 11 साल पुराने पुष्टाहार की धोखाधड़ी और गबन के एक मामले में अदालत ने सात साल की सजा सुनायी है।आरोपी ज्योति तिवारी ने आंगनवाड़ी केन्द्रो के बच्चों को दिया जाने वाला सरकारी पुष्टाहार को बेचने के लिए किराये पर कमरा ले रखा था। पोल खुलने पर सीडीपीओ ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करके केस चलाया था।

बसरेहर की तत्कालीन प्रभारी बाल विकास परियोजना अधिकारी मधुबाला सक्सेना ने इकदिल थाने में 19 जनवरी 2012 को आरोपी ज्योति तिवारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इस मुकदमे में ज्योति पर पुष्टाहार के गबन का आरोप लगाया गया था।

जिलाधिकारी से की गई शिकायत के आधार पर नायब तहसीलदार सदर ने इस मामले की जांच की। जांच के दौरान वह लक्ष्मण कालोनी निवासी दिनेश बाबू के मकान पर पहुंचे तो वहां बाल विकास विभाग की ओर से छह साल तक के बच्चों को दिया जाने वाला पुष्टाहार की 83 बोरी पंजीरी रखी मिली थी।

इस जांच मे मौके पर पहुंची जिला कार्यक्रम अधिकारी रंजना सिन्हा को छानबीन मे पता चला कि जो पुष्टाहार आंगनवाड़ी केन्द्रो के बच्चों को वितरण होना था, उसको स्टोर कीपर ज्योति तिवारी ने अपने किराये के मकान में रखा हुआ है। इस पुष्टाहार को रखने के लिए ज्योति तिवारी मकान मालिक को दस रुपया प्रति बोरी किराया देती थीं। मकान मालिक ने बताया कि उसके मकान को स्टोर कीपर ज्योति तिवारी ने किराये पर ले रखा है।

इस संबंध में पुलिस ने सीडीपीओ मधुबाला की तहरीर के आधार पर ज्योति के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। इस मामले की पैरवी एसपीओ उदय श्याम तिवारी व एपीओ आशुतोष सिंह ने की थी। एसपीओ ने बताया कि इस मामले की छानबीन के बाद पुलिस ने उनके खिलाफ कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल कर दिया।

इस मामले की सुनवाई करते हुये मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नीरज कुशवाहा ने स्टोर कीपर ज्योति तिवारी को दोषी पाया और सरकारी धन के गबन के आरोप में सात साल की सजा व 25 हजार रुपये अर्थदंड का आदेश दिया। कोर्ट के आदेश के बाद आरोपी को जेल भेज दिया गया। अवगत हो कि स्टोर कीपर ज्योति तिवारी पांच साल पहले ही रिटायर हो चुकी हैं।

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