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18 हजार मानदेय और राज्य कर्मी का दर्जा की उम्मीद छोड़ रही आंगनवाड़ी

केंद्र सरकार द्वारा 1975 से चलायी जा रही समेकित बाल विकास योजना मे बच्चों के पोषण, महिलाओं के स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में सेवा देने वालीं लाखों आंगनबाड़ी कार्यकत्री अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रही हैं। लेकिन 50 साल बीतने के बाद भी इन आंगनवाड़ी वर्करो को मिलने वाले मानदेय की स्थिति बदतर हालत मे है।

केंद्र सरकार द्वारा पूरे देश की आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को एक समान मात्र 6 हजार रुपये मानदेय दिया जा रहा है। जबकि अधिकांश राज्यो की सरकारे अपने अंशदान से मानदेय दे रही है। लेकिन कुल मिलने वाले मानदेय की राशि इतनी भी नहीं है कि इस महंगाई के दौर मे अपने परिवार का जीवन यापन कर सके।

उत्तरप्रदेश की योगी सरकार द्वारा आंगनवाड़ी वर्करो को मात्र 1500 रुपये मानदेय और 1500 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है जिसमे मानदेय और प्रोत्साहन राशि मिलने का कोई निश्चित समय भी निर्धारित नहीं है। बाल विकास विभाग मे बरसो से अपनी सेवाए दे रही आंगनवाड़ी वर्करो ने अब उम्मीद भी छोड़ दी है कि उनको भी कभी 18,000 रुपये मानदेय या राज्य कर्मी का दर्जा मिलेगा।

आंगनवाड़ी केन्द्रो मे बच्चों को पोषण और शिक्षा के साथ साथ संस्कार भी दिये जाते हैं, जो जीवन की बुनियाद होते हैं। इसके साथ साथ गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच से लेकर बच्चों के टीकाकरण और किशोरियों के पोषण तक की ज़िम्मेदारी आंगनवाड़ी वर्करो की होती है।

केंद्र संचालन के अतिरिक्त अन्य सर्वो के कार्यो मे चिलचिलाती धूप, तेज बारिश का सामना भी करना पड़ता है। समाज के लोगो से तिरस्कार, उपेक्षा और अपमान भी सहना पड़ता है। इसके बाद भी इनके कार्यो को अंशकालिक माना जाता है। अपने विभाग के अतिरिक्त दूसरे विभागो के कार्य भी आंगनवाड़ी वर्करो को दिये जाते है।

आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के मन की बात सुने तो इनकी बातों में गम और गुस्सा दोनों झलकता है लेकिन मजबूरी के कारण सब शांत रहती है। बच्चों को मुस्कराना सिखाने वाली आंगनवाड़ी की आंखों के आंसू सूख चुके हैं।आंगनवाड़ी के कार्यो की ईमानदारी का सिला सरकार सिर्फ तिरस्कार से दे रही है।

1975 से इस योजना की शुरुवात की गयी थी जिसमे आंगनवाड़ी वर्करो को छह सेवाएं प्रदान करने की जिम्मेदारी दी गयी थी। जिसमे अन्नपूरक पोषाहार, स्कूल पूर्व शिक्षा, टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच व पोषण, स्वास्थ्य शिक्षा और संदर्भ सेवाएं शामिल हैं। केन्द्रो का संचालन का समय सुबह दस से दो बजे तक करने के बाद एक घंटे होम विजिट का कार्य किया जाता हैं। आंगनवाड़ी को कोई लंच का समय भी नहीं मिलता है।

आंगनवाड़ी कार्यकत्री को विभागीय कार्य के अतिरिक्त बीएलओ, स्वास्थ्य विभाग, मातृत्व योजना, जनगणना, पल्स पोलियो के कार्यों की ज़िम्मेदारी भी निभानी पड़ती हैं। लेकिन इसके बाद भी बहुत सी कार्यकत्रियों को महीनों तक मानदेय नहीं मिलता। साथ ही आंगनवाड़ी को न कोई रिटायरमेंट योजना, न पेंशन, न कोई ग्रेच्युटी का लाभ दिया जाता है। वर्षो तक सेवाए देने के बाद भी जब आंगनवाड़ी रिटायर होती हैं, तो विभाग द्वारा कोई सम्मान तक नहीं दिया जाता है।

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