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सहायिका को पदोन्नति से मुख्य सेविका क्यों नहीं बनाया जा सकता ? : हाईकोर्ट

बाल विकास विभाग मे केंद्र सरकार के नियमानुसार मुख्य सेविका के पदो पर भर्ती के लिए कार्यकत्रियों को 50% आरक्षण दिया जाता है। साथ ही मुख्य सेविका के पद पर योग्य और मानक पूरा करने वाली आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को पदोन्नत करते हुए मुख्य सेविका के पद पर चयनित किया जाता है।

लेकिन समान योग्यता रखने वाली आंगनवाड़ी सहायिका को मुख्य सेविका के पद पर भर्ती के लिए योग्य नहीं माना गया है इस सम्बंध मे मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। जिस पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने महिला बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव, डायरेक्टर व ज्वाइंट डायरेक्टर के साथ ही कर्मचारी चयन आयोग के संचालक को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है

मध्यप्रदेश के रीवा निवासी मिथिलेश सुमन ने हाईकौर्ट मे दायर की गयी याचिका में कहा है कि “वह आंगनबाडी सहायिका के पद पर कार्यरत है। राज्य मे आंगनबाड़ी सुपरवाइजर भर्ती परीक्षा 2024 का विज्ञापन जारी किया गया है लेकिन भर्ती नियमावली के अनुसार इस पद के लिए केवल आंगनबाड़ी कार्यकत्री ही आवेदन कर सकती हैं।

आंगनबाड़ी सुपरवाइजर के पदों पर निकली भर्ती में आंगनबाड़ी सहायिकाओं को योग्य नहीं माना गया है जिसके कारण वो आवेदन नहीं कर सकती। इस मामले को लेकर हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल व जस्टिस अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए भर्ती से संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है।

याचिकाकर्ता मिथिलेश सुमन ने दायर याचिका में बताया है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका के लिए शैक्षणिक योग्यता सहित अन्य अहर्ताएं एक समान निर्धारित हैं। सामान्य शैक्षणिक योग्यता व अहर्ताए होने के बावजूद आंगनबाडी सहायिकाओं को अयोग्य करार दिया जाना सामान्य के अधिकार का उल्लंघन है।

मुख्य सेविका भर्ती के लिए सहायिका को विभाग द्वारा योग्य न मानना यह निर्णय पूरी तरफ से भेदभाव पूर्ण है। मध्यप्रदेश उच्च न्यायलय की युगलपीठ ने याचिकाकर्ता की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए विभाग को नोटिस जारी किया है। मिथिलेश सुमन की तरफ से अधिवक्ता राजेश चंद्र तथा हैरी बमोरिया पैरवी कर रहे है।

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