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प्री-प्राइमरी कक्षाओं के शुरू करने पर प्रति आंगनवाड़ी केंद्रों को मिलेगी केंद्रीय मदद

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केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत आंगनवाड़ी केन्द्रो मे प्री-प्राइमरी या बाल वाटिका कक्षाओं से जोड़ने की कवायद तेज की जाएगी । नयी शिक्षा नीति के तहत प्री-प्राइमरी कक्षाओं को शुरू करने वाले स्कूलों को अब दो लाख तक की वित्तीय मदद दी जाएगी।

शिक्षा मंत्रालय ने समग्र शिक्षा अभियान के तहत सरकारी स्कूलों को दो लाख तक की वित्तीय मदद और आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री-प्राइमरी कक्षाओं के शुरू करने पर प्रति स्कूल एक लाख रुपए तक की मदद दी जाएगी। आंगनबाड़ी केंद्रों को यह मदद पांच वर्ष में एक बार दी जाएगी, जबकि सरकारी स्कूलों को यह मदद छात्रों की संख्या के आधार पर सालाना दी जाएगी। यह मदद स्कूल मे पंजीकृत प्रति बच्चा पांच सौ रुपए सालाना के आधार पर दी जाएगी।

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केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी और बाल वाटिका कक्षाएं शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करने के भी सुझाव दिये है । शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची में होने के कारण स्कूली शिक्षा को सर्वसुलभ बनाने के लिए केंद्र और राज्य दोनों को केंद्र सरकार द्वारा वित्तीय मदद प्रदान की जाती है।

शिक्षा मंत्रालय द्वारा नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत स्कूली शिक्षा के ढांचे में अब प्री-प्राइमरी को भी शामिल किया गया है। जिसमें बच्चों को अब तीन साल की उम्र से ही स्कूली शिक्षा में प्री- प्राइमरी व बालवाटिका कक्षाओं को जोड़ा गया है।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होने के बाद भी अभी भी सभी राज्यो के स्कूलो मे लागू नहीं हो सकी है वर्तमान समय मे देश के लगभग 11 लाख सरकारी स्कूलों में से अभी तक सिर्फ 1.88 लाख स्कूलों में ही प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू हो सकी है। जिसके कारण अभी भी एक बड़ी संख्या में स्कूल प्री-प्राइमरी शिक्षा से बहुत दूर है।

देश में चल रहे सभी आंगनवाड़ी केंद्रों को बालवाटिका और प्री-प्राइमरी स्कूलों के रूप में बदलने के बाद इन आंगनवाड़ी केंद्रों को प्री-प्राइमरी मे अपग्रेड किया जा रहा है। आंगनवाड़ी वर्करो को पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। आंगनवाड़ी केन्द्रो के नजदीकी स्कूलों को इसके लिए जोड़ा जा रहा है जिससे इन आंगनवाड़ी केंद्र से निकलकर बच्चे इन स्कूलों मे सीधे प्रवेश ले सकें।

संसद में पेश की गई एक रिपोर्ट के मुताबिक नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का सबसे बड़ा विरोध करने वाला राज्य पश्चिम बंगाल मे सबसे अधिक करीब 65 हजार स्कूलो को प्री-प्राइमरी से जोड़ा है। इस मामले मे 25 हजार स्कूलों को प्री-प्राइमरी से जोड़ने वाला असम दूसरे नंबर पर है। देश के जम्मू-कश्मीर, झारखंड, पंजाब, मेघालय और तमिलनाडु राज्यो मे भी प्री-प्राइमरी से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे है।

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