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बैंक विलय नीति के कारण प्रदेश में 50 हजार से ज्यादा आंगनवाडी का मानदेय प्रभावित,

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कुशीनगर जनपद में बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग में कार्यरत ज्यादातर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं को बैंकों के विलय के बाद से मानदेय नहीं मिल पा रहा है। जिले में अलग अलग ब्लोक की करीब चार हजार से ज्यादा आंगनवाडी कार्यकत्रियो ,मिनी आंगनवाडी और सहायिकाओं का मानदेय आईएफएससी कोड न बदले जाने व अन्य कारणों बेंक में स्थान्तरित नही हो रहा है। इससे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को परिवार का भरण- पोषण या अन्य जरूरी कार्यों को करने में परेशानी का सामना करनापड़ रहा है।


बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की तरफ से जनपद में कुल 1003 ग्राम पंचायतें तथा 1,540 राजस्व गांव में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा आंगनवाडी केंद्र संचालित किये जाते है। इन आंगनवाडी पर गांव की गर्भवती महिलाओं, किशोरियों और पांच साल से कम उम्र के बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए पुष्टाहार तथा अन्य सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी होती है।


बाल विकास विभाग के अनुसार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की जिले में संख्या 6,961 है। इनमें ज्यादातर आंगनवाडी वर्करो का खाता पूर्वांचल बैंक की शाखाओं में था। जब पूर्वांचल बैंक सहित कुछ अन्य बैंकों का विलय (प्रवर्तन) बड़ौदा यूपी बैंक सहित अन्य बैंक शाखाओं में हुआ तो आईएफएससी कोड सहित अन्य व्यवधान आने की वजह से उनके खाते में मानदेय का ट्रान्सफर होना बंद हो गया । आंगनवाडी वर्करो की लगातार शिकायत पर बाल विकास के द्वारा1,699 आंगनवाडी वर्करो के बैंक खातो में सुधार कर दिया गया है जिसके कारण उनका मानदेय आने लग गया है लेकिन अभी भी 5,262 आंगनवाडी का मानदेय फंसा हुआ है।

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इस सम्बंद में स्थानीय यूनियन की जिलाध्यक्ष ममता मिश्रा का कहना है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय 5,500 रुपये, सहायिका का 2750 और मिनी आंगनबाड़ी कार्यकत्री का 3,500 रुपये मानदेय है। अधिकतर आंगनवाडी वर्करो का तीन से सात माह का मानदेय बाकी है। इनमें कई ऐसी हैं, जिनके पति गुजर चुके हैं। मानदेय ही गुजर-बसर का आधार है, लेकिन वह भी बकाया होने के कारण आर्थिक समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इससे पूर्व में डीएम की मौजूदगी में एडीएम को ज्ञापन दिया गया था, लेकिन समस्या दूर नहीं हुई। अब पुनः डीएम से मिलकर उन्हें समस्या से अवगत कराया जाएगा तथा इसका निदान कराने की मांग की जाएगी।

बेंक विलय नीति में सात माह से फंसा मानदेय , भुखमरी की कगार पर पहुची 50 हजार से ज्यादा आंगनवाडी वर्कर , जिला स्तर से लेकर निदेशालय तक चक्कर लगा रही आंगनवाडी, 1,699 आंगनवाडी वर्करो के बैंक खातो में सुधार, अभी भी 5,262 आंगनवाडी का मानदेय फंसा


जिला कार्यक्रम अधिकारी शैलेंद्र राय ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की संख्या जनपद में 6,961 है। पूर्वांचल बैंक में ज्यादातर कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का खाता है। इस बैंक का बड़ौदा यूपी बैंक में विलय होने के बाद आईएफएससी कोड सहित अन्य चीजें न ठीक होने के कारण मानदेय रुक गया है। इनमें से 1,699 का ठीक करा दिया गया है। उनका मानदेय जा रहा है। अन्य का भी ठीक कराने का प्रयास किया जा रहा है। ठीक कराने के बाद बाकी आंगनवाडी वर्करो का मानदेय आना शुरू हो जायेगा

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